Tuesday, July 28, 2026
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मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा के लिए बढता बजट और कम होते बच्चे !

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  1. मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा के लिए बढता बजट और कम होते बच्चे !

    अमिताभ पाण्डे

मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा के लिए पिछले 15 वर्षों में बजट बढ़ते बढ़ते लगभग 40 हजार करोड रुपए तक पहुंच गया है ।
इसके बाद भी स्कूलों में पहली कक्षा से 12वीं कक्षा तक पढ़ने वाले छात्रों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते।
निजी स्कूलों से भी बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे हैं ।
पिछले 15 वर्षों में लगभग 78 लाख से अधिक लाख बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं।
शिक्षा पर लगातार बढ़ते खर्च के बावजूद स्कूलों से बच्चों का दूर होना बहुत चिंताजनक है।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को लेकर यह जानकारी हाल ही में राज्य विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर दिनांक 21 जुलाई 2026 में सामने आई है ।
यह जानकारी बताती है कि मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा के लिए बजट में तो हर साल बढ़ोतरी हो रही है लेकिन स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार कम हो रही है ।
सरकारी स्कूलों में
पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार हर साल कम क्यों हो रही है ?
इसका जवाब जानने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल के अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन संस्थान को रिसर्च रिपोर्ट बनाने की जिम्मेदारी भी दी थी लेकिन यह रिपोर्ट लगभग एक साल बीत जाने के बाद भी अब तक तैयार नहीं हो सकी है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा दिए गए जवाब में बताया गया है कि पिछले 6 वर्ष में कक्षा 1 से 12 वीं में पढ़ने वाले 28 लाख बच्चे कम हुए जबकि पिछले 15 वर्ष में 78 लाख बच्चे कम हैं ।
इस अवधि में
32 हजार 574 शासकीय विद्यालय कम हुए अर्थात या तो इन स्कूलों को बंद कर दिया गया अथवा आसपास के किसी सरकारी स्कूल में मर्ज कर दिया गया।
विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश के शासकीय तथा निजी विद्यालय में कुल मिलाकर पिछले 6 वर्षों में कक्षा 1 से 8 वीं तथा 9 से 12 वीं कक्षाओं में नामांकन क्रमशः 25.40 लाख तथा 2 लाख कम हुए ।
पिछले 10 वर्षों में शासकीय प्राथमिक विद्यालय की संख्या 1 लाख 14 हजार 237 से घटकर मात्र 81 हजार 663 रह गई ।
यह जानकारी विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न पर स्कूल शिक्षा विभाग मंत्री उदय प्रताप सिंह ने दी है।
अपने जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 में कक्षा 1 से 12 वीं तक शासकीय तथा निजी विद्यालयो में विद्यार्थीयों की संख्या 6 हजार 02 विद्यालयों में 10 से कम थी। इसी प्रकार 13 हजार 820 विद्यालयों में 20 से कम, 15 हजार 731 विद्यालयों में 30 से कम , 13 हजार 669 विद्यालयों में 40 से कम, तथा 9 हजार 484 विद्यालयों में 50 से कम है।
यहां यह बताना जरूरी है कि पिछले 10 वर्षों में स्कूलों में नामांकन में हो रही कमी के कारण का विश्लेषण कर एक माह में रिपोर्ट देने के लिए मई 2025 में अटल बिहारी संस्थान को पत्र दिया था, जिसकी रिपोर्ट आज तक प्राप्त नहीं हुई है।
वर्ष 2016-17 में शासकीय विद्यालयों में नियमित तथा अतिथि शिक्षक क्रमशः 34 हजार 5043 तथा 63 हजार 986 थे ।
वर्ष 2026-27 में 3 लाख 19 हजार 826 तथा 81 हजार 583 है ।
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि फरवरी 2026 के प्रश्न के उत्तर में सरकार ने बताया था कि प्रदेश में 5 हजार 735 विद्यालय जीर्णशीर्ण है तथा 1 हजार 725 विद्यालय में छात्र शौचालय तथा 1हजार 784 में छात्रा शौचालय नहीं है । जबकि अब उत्तर दिया जा रहा है कि एक भी विद्यालय जीर्णशीर्ण नहीं है तथा सारे विद्यालयों में शौचालय है। श्री ग्रेवाल ने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा विभाग में हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए मध्यप्रदेश विधानसभा में सच्चे सवालों के झूठे जवाब दिए जा रहे हैं।
श्री ग्रेवाल ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग प्रतिभाशाली विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल से प्राप्त 100 करोड़ वापस दे रहा है लेकिन बेरोजगारों की फीस से प्राप्त 297 करोड़ वापस नहीं दे रहा है । ये राशि वापस क्यों नहीं दी जा रही है ?
विधायक श्री ग्रेवाल के अनुसार विधानसभा में जो प्रश्न पूछा गया उसके उत्तर में यह नहीं बताया गया कि शिक्षक के कितने पद स्वीकृत हैं तथा कितने शिक्षक कार्यरत हैं ?
वर्ष 2025-26 की स्थिति में नियमित शिक्षक 3 लाख 19 हजार 826 बता रहे हैं जबकि फरवरी 2026 में दिए उत्तर में स्वीकृत पद 2 लाख 89 हजार 005 तथा कार्यरत शिक्षक 1 लाख 74 हजार 419 बताए गए थे।
सवाल यह है कि स्कूल शिक्षा विभाग असत्य और भ्रामक देकर क्या छुपाना चाहता है?
श्री ग्रेवाल ने कहा कि विधानसभा सत्र वर्ष 2025 में दिए उत्तर अनुसार शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 वीं में 138.22 लाख विद्यार्थी थे जो कि वर्ष 2026-27 में घटकर क्रमशः 75.75 लाख रह गये ।
इसी प्रकार निजी विद्यालयों में 67.16 लाख से घटकर 51.38 लाख हो गये। शासकीय स्कूलों में 62.47 लाख तथा निजी स्कूलों में 15.78 लाख यानी कुल मिलाकर 78.25 लाख विद्यार्थीयों की कमी कई प्रश्नों को जन्म देती है।
श्री ग्रेवाल ने प्रश्न किया कि क्या पहले की संख्या बोगस थी या अभिभावकों ने महंगाई की मार से बच्चों को पढ़ाना बंद कर दिया है? क्या मध्य प्रदेश के लगभग 80 लाख बच्चे पढ़ने के लिए दूसरे राज्य में चले गए हैं ?
श्री ग्रेवाल ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में स्कूल शिक्षा का बजट 6 हजार करोड़ से बढ़कर 40 हजार करोड़ हो गया लेकिन वहां पढ़ने वाले बच्चे आधे से भी कम हो गये ।
यह चिंताजनक है कि हर साल बजट बढ़ रहा है लेकिन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है।
आखिर इसका क्या कारण है ?

( लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं )                              अमिताभ पाण्डेय संपर्क -9424466269 )

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