Thursday, September 10, 2026
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संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को घोषित किया ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल विवाह अंत दिवस’

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जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क और भुवन विभु के प्रयासों को मिली वैश्विक मान्यता:

संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को घोषित किया ‘अंतर्राष्ट्रीय बाल विवाह अंत दिवस’नई दिल्ली/न्यूयॉर्क:
बाल अधिकारों के क्षेत्र में भारत के निरंतर और प्रभावी प्रयासों को अब वैश्विक फलक पर ऐतिहासिक सफलता मिली है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा 4 सितंबर को पारित एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत अब हर साल 27 नवंबर को “बाल, कम उम्र और जबरन विवाह अंत करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस” (International Day to End Child, Early and Forced Marriage) के रूप में मनाए जाने की घोषणा की गई है। इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के पीछे प्रमुख बाल अधिकार संगठन ‘जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन नेटवर्क’ (Just Rights for Children Network) और इसके अगुआ, बाल अधिकार प्रस्तावक **भुवन विभु** के लंबे समय से चल रहे प्रभावी प्रयासों की अहम भूमिका रही है।
भारत की पहल और वैश्विक गूंज
यह ऐतिहासिक दिन ऐसे समय में तय किया गया है जब भारत में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी के नेतृत्व में बाल विवाह के खिलाफ देशव्यापी मुहिम को अभूतपूर्व गति मिली है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा 27 नवंबर (2024) को ही ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ (Bal Vivah Mukt Bharat) अभियान की शुरुआत की गई थी, जिसे अब संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक वैश्विक दिवस के रूप में मान्यता मिलना भारत की नीतियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जीत माना जा रहा है।
इस ऐतिहासिक घोषणा के मुख्य बिंदु:जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन’ और भुवन विभु का योगदान:नेटवर्क के संस्थापक और जाने-माने बाल अधिकार वकील भुवन विभु के नेतृत्व में देश भर में कानूनी सुधारों, बाल सुरक्षा और बाल विवाह के खिलाफ जन-जागरूकता अभियानों ने इस कुरुति को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में ला खड़ा किया है।
केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के प्रयास: केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा शुरू किए गए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान और 100 दिवसीय तीव्र जागरूकता अभियानों ने यह साबित कर दिया है कि भारत 2030 के सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को हासिल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
2030 का वैश्विक लक्ष्य: यह संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 2030 तक दुनिया भर से बाल विवाह की प्रथा को पूरी तरह समाप्त करने के संकल्प को और मजबूत करता है।
कारगर मंच और नीतियां: 27 नवंबर को यह अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित होने से भारत समेत दुनियाभर के देशों, नागरिक समाज संगठनों और अंतरराष्ट्रीय निकायों को बाल विवाह जैसी प्रणालीगत कमियों से निपटने के लिए एक साझा वैश्विक मंच मिल गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के जमीनी प्रयासों और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के इस अनूठे समन्वय से न केवल भारत बल्कि दक्षिण एशिया और पूरी दुनिया में बाल विवाह के खिलाफ लड़ाई को एक नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।
Universal Reporter
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