Friday, September 11, 2026
5x11 copy

Top 5 This Week

Related Posts

1154cc34-3f68-4676-8ff5-053a3b6f02e9
previous arrow
next arrow

बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम: बाल तस्करी के खिलाफ छेड़ी जंग

5x11 copy
previous arrow
next arrow

बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम:

केएसएस ने रायसेन जिले में बाल तस्करी के खिलाफ छेड़ी निर्णायक जंग
विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में हुए राष्ट्रीय परामर्श में लिया गया संकल्प; 2030 तक चलेगा राष्ट्रव्यापी अभियान
रायसेन / नई दिल्ली:
जिले में बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए सक्रिय गैर-सरकारी संगठन ‘कृषक सहयोग संस्थान’ (KSS) ने विश्व मानव दुर्व्यापार विरोधी दिवस के मौके पर बाल तस्करी (Child Trafficking) के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान किया है। नई दिल्ली में नेशनल कैंपेन अगेंस्ट चाइल्ड ट्रैफिकिंग’ की शुरुआत के अवसर पर संगठन ने स्पष्ट किया कि सरकार, प्रशासन और आम नागरिकों के सामूहिक सहयोग से रायसेन जिले से बाल तस्करी को पूरी तरह समाप्त किया जाएगा।
जागरूकता और कानूनी कार्रवाई पर रहेगा जोर
संगठन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जिले में बाल तस्करी की रोकथाम के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके साथ ही तस्करों (Traffickers) की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। हाशिए पर जीवनयापन कर रहे गरीब परिवारों की पहचान कर उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि बच्चे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और किसी भी आपराधिक गिरोह के चंगुल में फंसने से सुरक्षित रह सकें।
राष्ट्रीय नेटवर्क की पहल:यह राष्ट्रव्यापी अभियान बाल अधिकारों के लिए जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के नेटवर्क ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) के तत्वावधान में शुरू किया गया है। देश के 782 जिलों से आए प्रतिनिधियों के चार दिवसीय राष्ट्रीय परामर्श “इंश्योरिंग ए चाइल्ड Rights, पोटेंशियल एंड प्रॉस्पेरिटी” में यह निर्णय लिया गया। यह महत्वपूर्ण अभियान वर्ष 2030 तक संचालित किया जाएगा।
JRC के सहयोगी संगठनों के समन्वित प्रयासों से देशभर में अप्रैल 2023 से दिसंबर 2025 के बीच कुल 1,22,516 बच्चों को तस्करी के चंगुल से सुरक्षित बचाया जा चुका है, जिसमें ‘कृषक सहयोग संस्थान’ भी एक प्रमुख सहयोगी संगठन है।
केंद्रीय मंत्री ने की स्वयंसेवियों की सराहना-
नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस परामर्श के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री **सावित्री ठाकुर** ने कहा कि किसी भी बच्चे की जिंदगी बचाना सबसे नेक कार्य है। कम उम्र की बच्चियां अक्सर तस्करी का शिकार होकर अपने घरों तक नहीं लौट पातीं। ऐसी बालिकाओं के लिए समाज सेवा में जुटे स्वयंसेवी किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।
                 डॉ एच बी सेन,निदेशक कृषक सहयोग संस्थान 
चिंताजनक हैं बाल तस्करी के आंकड़े:   ‘कृषक सहयोग संस्थान’ के निदेशक डॉ. एच.बी. सेन ने इस गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डालते हुए बताया कि देश में रोजाना औसतन 6 बच्चों की तस्करी होती है और 5 बच्चों को जबरन मजदूरी के दलदल में धकेला जाता है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में हर घंटे 11 बच्चे गुम होते हैं, जिनमें से अधिकांश मामले मानव तस्करी से जुड़े होते हैं।
हथियारों और ड्रग्स के बाद **ह्यूमन ट्रैफिकिंग दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध** बन चुका है, जिसमें महिलाएं और बच्चे मुख्य रूप से निशाना बनते हैं।
डॉ. सेन ने समाज को आगाह करते हुए कहा कि तस्कर आमतौर पर बाहरी नहीं बल्कि आसपास के लोग ही होते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अच्छे जीवन का झूठा लालच देकर बच्चों को ले जाते हैं और उन्हें बंधुआ मजदूरी, भीख मांगने या अनैतिक धंधों में झोंक देते हैं। केएसएस का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बचाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
Universal Reporter
IMG-20260406-WA0103~2
previous arrow
next arrow

Popular Articles