भोपाल में “सुरक्षित बचपन, सुरक्षित भविष्य” पर जागरूकता कार्यशाला
— पाक्सो अधिनियम व बाल संरक्षण पर प्रशिक्षण
भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देश एवं माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, भोपाल ने आज पुलिस कंट्रोल रूम के सभाकक्ष में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के जागरूकता अभियान “सुरक्षित बचपन सुरक्षित भविष्य” के तहत एक व्यापक जागरूकता अभियान एवं कार्यशाला आयोजित की। कार्यक्रम का उद्देश्य बालकों का यौन अपराधों से संरक्षण एवं संबंधित संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ भोपाल पुलिस की डीसीपी श्रद्धा तिवारी, प्राधिकरण सचिव एवं न्यायाधीश सुनीत अग्रवाल, ए.डी.सी.पी. मंजुलता खत्री और बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. धनीराम पवार ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इसमें भोपाल के विभिन्न स्कूल-छात्रावास, महिला एवं बाल विकास विभाग के गृह, सामाजिक न्याय विभाग के छात्रावास, थानों के अधिकारी, विशेष किशोर पुलिस इकाई, पैरा लीगल वॉलंटियर, पैनल वकील तथा गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल होकर लगभग 100 से अधिक लोग उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ताओं में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के न्यायाधीश श्री सुनीत अग्रवाल, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. धनीराम पवार, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य श्री कृपा शंकर चौबे, मीत संस्था की सुश्री रेखा श्रीधर और बालिका गृह की प्रभारी श्रीमती आकांक्षा तोमर शामिल रहे। डॉ. पवार ने बाल कल्याण समिति के कार्यों और पाक्सो अधिनियम के अंतर्गत सपोर्ट पर्सन की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। श्री चौबे ने पाक्सो एवं जेजे एक्ट की धाराओं एवं अनुपालन प्रक्रियाओं पर प्रकाश डाला। सुश्री रेखा ने पुलिस की कार्यप्रणाली तथा बच्चों के संरक्षण से जुड़े ऑन-ग्राउंड कदमों पर चर्चा की जबकि श्रीमती तोमर ने विशेष आवासीय संस्थानों में बच्चों की देखरेख और सुरक्षा उपायों पर जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
कार्यक्रम में प्राधिकरण सचिव न्यायाधीश श्री सुनीत अग्रवाल ने निशुल्क विधिक सहायता, पीड़ितों के प्रतिकर (रिमेडी) और पाक्सो अधिनियम की बारीकियों पर जानकारी दी। विशेष रूप से उन्होंने उन क़ानूनी प्रावधानों पर जोर दिया जिनमें पाक्सो पीड़ित बच्चे की शिकायत दर्ज न कराने पर सजा का प्रावधान शामिल है, तथा सपोर्ट पर्सन और बाल कल्याण समिति की कार्यप्रणालियों का उल्लेख किया।कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस, छात्रावासों व बाल देखभाल संस्थानों में जागरूकता बढ़ाकर बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, विभिन्न विभागों के मध्य समन्वय सुदृढ़ करना और बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना बताया गया।







