बाल विवाह की काली सच्चाई: अधिकारों से वंचित महिलाओं की संघर्ष गाथा
रायसेन में विधिक जागरूकता शिविर में सर्वाइवर महिलाओं ने सुनाई मार्मिक आपबीती

रायसेन।जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन नेटवर्क की पार्टनर संस्था कृषक सहयोग संस्थान ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के आयोजित विधिक जागरूकता शिविर एवं प्रदर्शनी में बाल अधिकारों पर प्रभावशाली प्रदर्शनी लगाई। इस प्रदर्शनी का प्रतिनिधित्व सर्वाइवर नेटवर्क की 12 से अधिक महिलाओं ने किया। वे महिलाएं जिनका विवाह बचपन में ही हो गया था, जब उन्हें गृहस्थ जीवन की abc न के बराबर समझ थी।बचपन छीनने वाले विवाह का दर्दनाक अंजाम,इन महिलाओं ने साझा किया।
उन्होंने बतलाया कि कम उम्र में विवाह के कारण ससुराल में अनबन, हिंसा और दाम्पत्य जीवन का पूर्ण विघटन हो गया। मायके में भी समाज व घरवालों के तानों के बीच सहारा न मिला, जिससे उन्हें अलगाव में जीना पड़ा। आज ये महिलाएं किराए के मकानों में झाड़ू-पोंछा, बर्तन धोना, शादियों व सामूहिक आयोजनों में रसोई संभालने जैसे कार्यों से खुद व बच्चों का पेट पाल रही हैं। फिर भी,अस्थिर आजीविका, न्यून आय और सामाजिक असुरक्षा जैसी चुनौतियां इन्हें घेरे हुए हैं।
अधिकारियों से संवाद: स्थायी समाधान का भरोसा
कार्यक्रम में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार सुहाने, कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा व पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता ने महिलाओं के अनुभव सुने। अधिकारियों ने इन्हें स्थायी आजीविका से जोड़ने का आश्वासन दिया।
जिला करेक्टर में कृषक सहयोग संस्थान के कार्यो की सराहना की उन्होंने कहा कि बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई रोकने हेतु संस्थागत सहयोग अनिवार्य है।
यह पहल न केवल जागरूकता फैला रही है, बल्कि समाज को बाल विवाह के गहरे दुष्परिणामों की चेतावनी भी दे रही है। उन्होंने कहा कि सर्वाइवर महिलाओं को उबरने के लिए मजबूत संस्थागत समर्थन ही एकमात्र रास्ता है। महिलाओं को सुलभ और स्थायी स्वरोजगार से जोड़ने के निर्देश दिए।








