सृजन में बच्चों ने सीखा सफलता का राज: ‘लक्ष्य बनाओ, डायरी लिखो, मेहनत-ईमानदारी से पाओ मंजिल
मंडीदीप। ‘सृजन एक पहल शक्ति से सुरक्षा की ओर’ कार्यक्रम के दूसरे दिन औद्योगिक बस्तियों के अभावग्रस्त बच्चों को लक्ष्य निर्धारण और आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज (एएआईएम) सभागार में दोपहर 3 बजे शुरू हुए इस आयोजन को मध्यप्रदेश पुलिस, नेटलिंक फाउंडेशन व कृषक सहयोग संस्थान संयुक्त रूप से चला रहे हैं। सूत्रधार अनिल भवरे ने कहा, “लगन और सतत संघर्ष ही सफलता का असली रास्ता है।”
लक्ष्य बनाओ, डायरी में लिखो-
राजाभोज शासकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एसके भदौरिया ने जोर देकर कहा, “मेहनत-ईमानदारी बिना शॉर्टकट के ही मंजिल दिलाती है।” उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की कहानी सुनाई जिन्होंने गरीबी में अखबार बेचे, लेकिन लगन से ‘मिसाइल मैन’ और राष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उदाहरण दिया झारखंड की आदिवासी लड़की ने शिक्षिका से शुरू कर देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बनीं। धीरूभाई अंबानी व विराट कोहली की तरह रोज डायरी में लक्ष्य लिखने और टाइमटेबल फॉलो करने की सलाह दी। उन्होंने प्रेरित किया वैज्ञानिकों-राजनेताओं की तरह लगातार प्रयास करते हुए मेहनत और लगन दिखाओ।
आत्मरक्षा की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
कोच विनोद चौधरी ने जुम्बा पीटी के बाद व्यावहारिक डेमो से आत्मरक्षा सिखाई। मुक्के-घुटने से हमलावर को कैसे रोका जाए, यह दिखाया। बच्चों में जबरदस्त उत्साह दिखावे न सिर्फ खुद को सुरक्षित रखने, बल्कि समाज को मजबूत बनाने को संकल्पबद्ध हो गए। कार्यक्रम में कृषक संस्थान से राजकुमार साहू, शिवनारायण सराठे, कार्यकर्ता अमिता डेहरिया, सुनीता गौर रितेश गौर व बच्चे उपस्थित रहे।







