कृषक सहयोग संस्थान का बालश्रम से शिक्षा की ओर अभियान
जान जोखिम में डालकर रोड पर करौंदे बेच रहे आदिवासी बच्चे
क्षेत्र में शेर का मूवमेंट बच्चों ने जंगल मे शेर देखने की बात कही

रायसेन- जस्ट राइट्स फ़ॉर चिल्ड्रन नेटवर्क की पार्टनर संस्था कृषक सहयोग संस्थान रायसेन के कार्यकर्ताओं ने मुख्यमार्ग पर करौंदे बेचने वाले बच्चों के परिजनों साथ मीटिंग की एवं मेपिग करने का प्रयास किया। पता चला कि यह पर पलायन कर आये भील समुदाय और बंजारा समुदाय के लोग हैं। रतनपुर की घाटी के मोड पर जंगल से दर्जनों बच्चे वन उपज करौंदे तोड़कर बेचते है।यह सिलसिला कई वर्षों से अनवरत चलता आ रहा है। अभी जैसा कि आये दिन इस क्षेत्र में बाघ का मूवमेंट भी रहता है ।बाघ ने दो लोगों और पशुओं पर प्राणघातक हमला भी किया है। जिसमें कई पशुयों की जान भी गई है,ऐसे में यह बच्चों के लिए बड़ा खतरा है,बच्चो की जान भी जोखिम में है।
बच्चे इस रोड पर आने-जाने वाले वाहनों के सामने झुंड बनाकर दौड़कर आते है।राहगीर कभी दया कर या शौकिया के बच्चो से करौंदा,जामुन आदि खरीदते हैं। संस्था के जिला समन्वयक अनिल भवरे ने बताया कि संस्था का उद्देश्य ऐसे बच्चों को जोखिम भरे कार्य से दूर कर इस समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में सामुदायिक पहल कर उन्हें शिक्षा से जोड़ना है। करौंदे बेचने वाले आदिवासी समुदाय के बच्चों ने बताया कि उनका नाम स्कूल में लिखा है लेकिन वह
नही जाते। प्रदेश में बाल विवाह की स्थिति चिंताजनक,हाईकोर्ट का आदेश-बाल विवाह के खिलाफ पूरे देश में उठाए जाएं सख्त कदम
जान जोखिम में डालने को मजबूर बच्चे-
संस्था के कार्यकर्ताओं ने रोड पर करौंदे बेचते इन बच्चों से बात की तो उन्होंने बताया वह रतनपुर रहते है आदिवासी हैं। गर्मियों के मौसम में करौंदे बेचकर प्रतिदिन दो सौ से 5 सौ रु तक कमा लेते हैं। उनका साल भर पढ़ाई का खर्च चल जाता है। वे खुद की जरूरत के समान के साथ परिवार की भी आर्थिक मदद करते हैं। प्रतिदिन नगद पैसे का लालच उन्हें इस जोखिम भरे कार्य को करने के लिए प्रेरित करता है।
बाल विवाह मुक्त भारत अभियान में होगी सबकी भागीदारी जिले में एक भी बाल विवाह न होने पाए इसके लिए सतर्क रहेंगें निगरानी दल नही जाते स्कूल,नाम दर्ज है –वंचित समुदाय के करौंदे बेचने वाले बच्चों से संस्था के कार्यकर्ता जगदीश शर्मा गोविंद नाविक राहुल यादव राहकुमार साहू और प्रगति रैकवार ने बाल श्रम से शिक्षा की ओर अभियान अंतर्गत आज चर्चा की। उन्होंने बताया कि स्कूल में तो नाम लिखा है लेकिन वह स्कूल नहीं जाते। गर्मियों में वह जंगल से करौंदे और जामुन तोड़कर बेचने का काम करते हैं। उन्हीं में से एक बालिका ने बताया कि आज उन्होंने शेर को वनगवां के पास शांतिनगर की तरफ देखा। यह बच्चों के लिए जान जोखिम में डालने वाला कार्य है।
वर्षों से जोखिम उठा रहे बच्चे-
कृषक सहयोग संस्थान के निदेशक डॉ एच बी सेन ने बताया इस जोखिम भरे कार्य में इस रोड और इसी स्थान पर वर्षों से बच्चों को करौंदे बेचते बच्चों को देखा गया है। आते जाते प्रशासनिक अधिकारी भी इन्हें देखते हैं। लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला जा सका। अब जंगल में बाग का मूवमेंट है। ऐसे में बच्चों की जान को अधिक जोखिम है।







