बेड़िया समुदाय के सशक्तिकरण की दिशा में परामर्श बैठक
प्रोजेक्ट उड़ान’ से तीन साल में बदला 12 गाँवों का हालात
भोपाल। चाइल्ड राइट्स एंड यू (क्राई) द्वारा बेड़िया समुदाय के बच्चों के सशक्तिकरण को लेकर भोपाल में बहु-हितधारक परामर्श बैठक आयोजित की गई, जिसमें समुदाय प्रतिनिधि, सरकारी विभाग, कानून प्रवर्तन अधिकारी और बाल अधिकार विशेषज्ञों सहित लगभग 70 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। बैठक का फोकस बेड़िया समुदाय की बच्चियों के शोषण की पारंपरिक प्रथाओं को रोकने, शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने पर रहा।
इस अवसर पर क्राई की पाँच वर्षीय पहल ‘प्रोजेक्ट उड़ान’ (2021–2025) के परिणाम प्रस्तुत किए गए, जिसके तहत सागर और गुना जिलों के बेड़िया समुदाय के बच्चों—विशेषकर बालिकाओं—के लिए शिक्षा, सुरक्षा और दीर्घकालिक आजीविका अवसरों पर काम किया गया। तीन वर्षों से 12 गाँवों में बेड़िया समुदाय की कोई भी किशोरी पारंपरिक शोषणकारी प्रथाओं में नहीं गई, किशोरों का स्कूल नामांकन 90 प्रतिशत से अधिक हो गया है और ड्रॉपआउट व बाल श्रम के मामलों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
परामर्श बैठक में एनएलआईयू भोपाल के प्रो. डॉ. बीरपाल सिंह ने मानव तस्करी और प्रवासन पर कानूनी दृष्टिकोण रखा, डीआईजी (कम्युनिटी पुलिसिंग) विनीत कपूर ने शोषण की रोकथाम पर बात की और एआईजी अमृत मीना ने बच्चियों के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण शुरू करने का सुझाव दिया।

डीएनटी निदेशक बुद्धेश वैद्य ने वंचित जनजातियों के बच्चों के लिए शिक्षा व छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी दी, जबकि राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा ने बाल संरक्षण के संस्थागत तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया।
राज्य महिला आयोग के सचिव सुरेश तोमर ने लैंगिक समानता और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर विचार रखे, वहीं राज्य साइबर सेल के पुलिस अधीक्षक प्रणय नागवंशी ने साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन शोषण की उभरती चुनौतियों पर चर्चा की।
अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल कोच ए. सुरेश, एकलव्य पुरस्कार प्राप्त शत्रुघ्न यादव और राष्ट्रीय एथलीट रितेश चौधरी ने खेल को अनुशासन, आत्मविश्वास और वैकल्पिक अवसरों से जोड़ते हुए युवाओं को खेल से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
बैठक में समुदाय के बच्चों ने भी भागीदारी करते हुए अपनी चुनौतियाँ और सपने साझा किए, जिससे जमीनी हकीकत सीधे नीति निर्माताओं और अधिकारियों के सामने आई। प्रोजेक्ट उड़ान के तहत बच्चों को शैक्षणिक सहयोग, छात्रवृत्ति व आवासीय छात्रावासों से जोड़ने, जीवन कौशल, करियर परामर्श, डिजिटल साक्षरता, खेल और थिएटर जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सशक्त बनाने का साझा अनुभव भी रखा गया।
क्राई की प्रोग्राम हेड (नॉर्थ) जया सिंह ने कहा कि जब समुदाय, संस्थाएँ और युवा साथ मिलकर काम करते हैं तो पीढ़ियों से चला आ रहा शोषण का चक्र टूट सकता है, और बच्चों के लिए गरिमा, विकल्प व अवसर सुनिश्चित किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि अधिक बालिकाएँ अब माध्यमिक शिक्षा पूरी कर उच्च शिक्षा और सम्मानजनक आजीविका की ओर बढ़ रही हैं, जबकि सैकड़ों अभिभावक अपनी बेटियों को शिक्षा से जोड़े रखने और शोषणकारी परंपराओं को छोड़ने का संकल्प ले चुके हैं।
इस अवसर पर प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर रश्मि मनी,क्राई फैलो रेखा श्रीधर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम का समापन ओपन फोरम चर्चा के साथ हुआ, जिसमें यह साझा संदेश उभरा कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों के बच्चों के अधिकार सुरक्षित रखने के लिए निरंतर साझेदारी और सामूहिक जिम्मेदारी आवश्यक है।








