पडोनिया में श्रीमद्भागवत भागवत कथा:
पूतना वध से गूंजा गोकुल, कृष्ण बाल लीलाओं और गीतों ने बांधा भक्तों को
मंडीदीप। ग्राम पडोनिया में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन शुक्रवार को कथा वाचक मानस मोहिनी संध्या दीदी ने श्रीकृष्ण जन्म और बाल लीलाओं का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि भक्तजनों की आह्लाद की लहर दौड़ गई। देवकी की कोठरी से गोकुल प्रवास तक का प्रसंग सुनाते हुए दीदी ने कहा—यह जन्म अधर्म नाश का संदेश था। माखन चोरी, त्रिकोण भंग जैसी लीलाओं से जीवन का सबक दिया—सरलता और भक्ति अपनाओ।पूतना वध का चरम प्रसंग सुनाते हुए भावविभोर हो गईं। राक्षसी पूतना विष पिलाने आई, लेकिन कृष्ण लीला रची। पूतना बोली, ‘हे शिव! आप विष धारण करते हो, मैं कृष्ण का पान करूंगी।’ विष पीकर भगवान ने उसे मुक्ति दी।
दीदी ने बताया कि भगवत कृपा से पापी भी तर जाते हैं।उन्होनें कहा कि भगवान का नामकरण संस्कार गर्गाचार्य ने 6 वर्ष की आयु में किया। उनका सम्पूर्ण जन्म से लेकर जीवन पर्यन्त संघर्ष का रहा। कृष्ण एक मात्र व्यक्तित्व हैं जिसने अपने जीवन के प्रत्येक पर राह दिखाई। उनकी लीलाओं में लोककल्याण और प्रकृति पूजा का सन्देश मिलता है।
कथा में भक्ति गीतों पर सर्ड्दलुओं ने जम कर आनन्द उठाया और नाचे। शाम 6 बजे आरती के बाद कथा का विराम हुआ। कल कथा का छठा दिन है।








