महादेव भोजपुर महोत्सव-युवा पीढ़ी जुड़ी परंपराओं से
शिवमय महोत्सव ने बांधा समां-लोक कलाओं और भक्ति भजनों से गुंजायमान हुआ भोजपुर मंदिर,
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर भोजपुर के प्राचीन शिव मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय “महादेव” भोजपुर महोत्सव का पहला दिन भक्तों और कला प्रेमियों के अपार जनसमूह से आलोकित हो गया। मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और रायसेन जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित इस उत्सव ने शिव भक्ति को लोक संस्कृति के माध्यम से जीवंत कर दिया, जहां हजारों श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में एकत्र होकर दिव्य वातावरण में डूब गए।
अतिथियों की उपस्थिति में भव्य शुभारम्भ-
मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत सिंह मीणा ने दीप प्रज्ज्वलन कर महोत्सव का शुभारंभ किया। नगर परिषद अध्यक्षों प्रियंका राजेन्द्र अग्रवाल और लक्ष्मी सोनू चौकसे सहित पूर्व नेताओं राजेंद्र अग्रवाल, रवींद्र विजयवर्गीय तथा भोजपुर मंदिर महंत पवन गिरी महाराज की मौजूदगी में आयोजन ने स्थानीय समुदाय की एकजुटता का प्रतीक बन गया। संस्कृति संचालक एन.पी. नामदेव और अनुविभागीय अधिकारी चंद्रशेखर श्रीवास्तव ने भी आयोजन में सम्मलित हुए जो इस आयोजन को सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का मजबूत माध्यम बनेगा।
बुंदेली लोकगीतों ने बहाया शिवत्व का रस-
पहले सत्र में सागर के ऋषि विश्वकर्मा और साथियों ने बुंदेलखंडी लोकगायन से मंच पर शिव बारात का जीवंत चित्रण किया। “शिव शंकर जी बनके दुल्हा मोरी नगरिया आए जू” जैसे गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया, जबकि “दुल्हा बनके महादेव बाबा गांव में आ गए रे” ने महाशिवरात्रि की भव्यता को प्रतिबिंबित किया। इन गीतों ने न केवल आस्था जगाई, बल्कि बुंदेली संस्कृति की समृद्धि को युवाओं तक पहुंचाया ।
बधाई-बरेदी नृत्यों का उमंगमय प्रदर्शन-

सागर के उमेश नामदेव और टीम ने बधाई एवं बरेदी लोकनृत्यों से मंच को मांगलिक ऊर्जा से भर दिया। शिवरात्रि के संदर्भ में ये नृत्य शुभता और उल्लास के प्रतीक बने, जहां परंपरागत वेशभूषा और तालों ने दर्शकों को नृत्य की थिरकनों में खींच लिया। यह प्रस्तुति लोक जीवन के आनंद को शिव भक्ति से जोड़ने का अनुपम उदाहरण रही।
भजन सम्राट लक्खा की प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध-
मुंबई के लखबीर सिंह लक्खा ने “जय शंभू जय जय शंभू” जैसे भजनों से समापन किया, जिससे पूरा परिसर “हर-हर महादेव” के नारों से गूंज उठा। उनकी स्वर लहरियों ने श्रद्धा और समर्पण का ऐसा संगम रचा कि श्रोता तालियों और जयकारों से अभिभूत हो गए। यह महोत्सव सांस्कृतिक एकता को मजबूत करते हुए आगामी दिनों में कवि सम्मेलन और अन्य प्रस्तुतियों के साथ जारी रहेगा








